
बिलासपुर। वक्त बदला, जमाना बदला, लेकिन भगवान राम की गाथा और रामलीला के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है। बिलासपुर के रेलवे परिक्षेत्र में हिंदुस्तानी सेवा समाज पिछले 76 वर्षों से रामलीला का भव्य आयोजन कर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की लौ जलाए हुए है। आधुनिकता के इस दौर में भी रामलीला का मंच लोगों को अपनी जड़ों, संस्कारों और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्शों से जोड़ रहा है।
11 अक्टूबर को गणेश वंदना और शिव-पार्वती की मंगला आरती के साथ इस वर्ष की रामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवान राम के बाल्यकाल का सुंदर मंचन किया गया। उत्तर प्रदेश के कानपुर से आए जय महाकाली नाट्य कला मंच के कलाकार रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर रहे हैं। 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में राम जन्म से लेकर वन गमन, भरत मिलाप, सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।
रामलीला की खासियत यह है कि यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का संदेश देने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी है। 76 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह परंपरा बताती है कि नई पीढ़ी के दौर में भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्व कम नहीं हुआ है। रामलीला के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास आज भी उसी उत्साह के साथ जारी है।
हिंदुस्तानी सेवा समाज की इस गौरवशाली परंपरा का समापन 20 अक्टूबर को एन.ई. इंस्टीट्यूट मैदान में रावण दहन के साथ होगा। वर्षों से चली आ रही यह रामलीला बिलासपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सच यही है कि समय भले ही बदल जाए, लेकिन रामलीला की आस्था और भगवान राम के आदर्शों की प्रासंगिकता सदैव बनी रहती है।
शुभारंभ एवं मंगला आरती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नवीन सिंह (प्रधान मुख्य सामग्री प्रबंधक), ए.वी.एस. नेहरू (संस्थापक, सत्य साई सेवा समिति), यू. शिव शंकर राव (मंडल कार्मिक अधिकारी), वी. रामाराव (पूर्व पार्षद एवं विधानसभा प्रभारी, कोरबा), प्रकाश यादव (एमआईसी मेंबर एवं पार्षद) तथा एम. श्रीनिवास राव (अध्यक्ष, जोन-6 एवं पार्षद) उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
11 से 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन रात्रि 7 बजे से 10 बजे तक रामलीला का भव्य मंचन किया जाएगा। इसमें नारद मोह, राम जन्म, मुनि याचना, ताड़का वध, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, राम वन गमन, केवट संवाद, भरत मिलाप, पंचवटी, सीता हरण, सुग्रीव मित्रता, लंका दहन और लक्ष्मण शक्ति जैसे प्रमुख प्रसंगों का मंचन होगा। 20 अक्टूबर को एन.ई. इंस्टीट्यूट मैदान में रावण दहन के साथ दशहरा उत्सव का समापन किया जाएगा।
इस अवसर पर हिंदुस्तानी सेवा समाज के अध्यक्ष हिम्मत सिंह भदौरिया, सचिव सी. नवीन, एन.के. मालेवर, आर.के. मिश्रा, कोषाध्यक्ष वी.के. तिवारी, पी.के. नगायच, नागेंद्र राय, संजय सिंह, स्वरूप हलदर, हर्षवर्धन प्रसाद सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे। आयोजन के माध्यम से रेलवे परिक्षेत्र में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और भगवान राम के आदर्शों का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।



