
बिलासपुर जिले में VSK एप पर 1618 शिक्षकों के गैरहाजिर पाए जाने के बाद ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक बिल्हा में 659, मस्तूरी में 384, तखतपुर में 323 और कोटा में 252 शिक्षक एप पर गैरहाजिर दर्ज हुए हैं। अब सवाल यह है कि इनमें कितने शिक्षक वास्तव में स्कूल से अनुपस्थित थे और कितनों की हाजिरी तकनीकी कारणों से दर्ज नहीं हो सकी।
यदि शिक्षक वास्तव में स्कूल से अनुपस्थित थे तो संबंधित स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग करने वाले बीईओ, संकुल समन्वयक और निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं यदि तकनीकी समस्या के कारण ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगी, तो केवल एप के आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों पर कार्रवाई को लेकर भी विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
इसी बीच मल्हार में छात्राओं की ओर से सैनिटरी पैड और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचने का मामला भी चर्चा में है। नए जिला शिक्षा अधिकारी के सामने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच, स्कूलों की प्रभावी मॉनिटरिंग और शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। महज दो वर्षों में चार DEO बदलने और प्रभार व्यवस्था को लेकर भी स्थायित्व पर सवाल उठ रहे हैं।
अब सवाल यह भी है कि यदि ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था लागू है तो जिला शिक्षा अधिकारी और बीईओ कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति की भी इसी तरह मॉनिटरिंग हो रही है या नहीं। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही केवल शिक्षकों की नहीं, बल्कि पूरे मॉनिटरिंग सिस्टम की होनी चाहिए। विभाग को स्पष्ट करना होगा कि 1618 मामलों में वास्तविक अनुपस्थिति कितनी थी और तकनीकी कारणों से हाजिरी दर्ज नहीं होने वाले शिक्षक कितने थे।



